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32-35 लाख रुपये की अवैध वसूली मामला: मुंगेली के पूर्व DPRO सुजीत सिंह के खिलाफ जांच के आदेश, 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

अभय न्यूज रायपुर / मुंगेली,10 अक्टूबर 2026।

छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क संचालनालय ने स्वतंत्रता दिवस और सौजन्य भेंट के नाम पर विभिन्न सरकारी विभागों से लाखों रुपये की अवैध वसूली के गंभीर आरोपों पर बड़ी कार्रवाई की है। जिला मुंगेली के तत्कालीन जिला जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) / सहायक संचालक सुजीत सिंह की संलिप्तता के आरोपों की जांच के लिए शासन द्वारा दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है।

सीएम हेल्प लाइन में हुई थी शिकायत

सरकारी आदेश के अनुसार, जिला मुंगेली के शिकायतकर्ता खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने सीएम हेल्प लाइन-1076 में एक गंभीर शिकायत (क्रमांक WP260500179499) दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिला पंचायत सीईओ मुंगेली गोकुल रावटे एवं तत्कालीन डी.पी.आर.ओ. व वर्तमान सहायक संचालक सुजीत सिंह द्वारा जिले के विभिन्न विभागों से स्वतंत्रता दिवस और सौजन्य भेंट के नाम पर लगभग ₹32 से 35 लाख की अवैध वसूली की गई है। आरोप है कि इस राशि को आपस में बांट लिया गया, जिसमें विभाग के अधिकारी सुजीत सिंह की मुख्य संलिप्तता है।

3 दिन के भीतर मांगी जांच रिपोर्ट

इस गंभीर मामले की वास्तविकता का पता लगाने के लिए जनसंपर्क संचालनालय, नवा रायपुर ने नियमनुसार प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। इसके लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को जांचकर्ता नियुक्त किया गया है:

1. श्री संतोष मौर्य (अपर संचालक)

2. श्री जितेन्द्र नागेश (संयुक्त संचालक)

आदेश में जांच अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे सुजीत सिंह से संबंधित इस शिकायत का बारीकी से परीक्षण करें और तीन दिवस के भीतर अपनी स्पष्ट अभिमत सहित प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन (रिपोर्ट) संचालनालय को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

यह आदेश आयुक्त जनसंपर्क द्वारा अनुमोदित होने के बाद अपर संचालक (स्थापना/प्रशासन) द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है, जिसकी प्रतिलिपि कलेक्टर मुंगेली, कमिश्नर बिलासपुर और जनसंपर्क विभाग के उप सचिव को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है।

जांच आदेश में शिकायतकर्ता को प्रतिलिपि न होना: प्रशासनिक प्रक्रिया की चूक अथवा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन?

जनसंपर्क संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालयीन आदेश (क्रमांक 5559) के माध्यम से मुंगेली जिले के कथित वित्तीय कदाचार मामले में दो सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया है। इस आदेश का परीक्षण करने पर एक गंभीर विधिक विसंगति स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है—आदेश की पृष्ठ संख्या 1 एवं 2 पर प्रतिलिपि (सूचनार्थ) की सूची में संचालक, कलेक्टर मुंगेली, उप सचिव, संभागीय संयुक्त संचालक, संबंधित अधिकारी एवं गार्ड फाइल तक को शामिल किया गया है, किंतु मूल शिकायतकर्ता खेमेश्वर पुरी गोस्वामी को इसकी अधिकृत प्रतिलिपि या सूचना प्रेषित नहीं की गई है।

जब किसी मामले में नागरिक या पत्रकार द्वारा ठोस साक्ष्यों के आधार पर शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो जांच दल के गठन की अधिकृत सूचना शिकायतकर्ता को देना अनिवार्य प्रशासनिक शिष्टाचार एवं विधिक औचित्य का हिस्सा है।

प्रशासनिक शब्दावली में इसे ‘एक्स-पार्टी’ या ‘एकतरफा जांच’ की श्रेणी में देखा जा सकता है, जो किसी भी गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामले में निष्पक्षता के विधिक मानदंडों पर खरी नहीं उतरती। यह स्पष्ट रूप से प्रशासनिक जांच में मनमानापन व अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

जनसंपर्क संचालनालय द्वारा जांच दल का गठन करना निश्चित ही सत्याग्रह और जनशिकायत का प्राथमिक प्रशासनिक परिणाम है। किंतु, शिकायतकर्ता को सूचनार्थ प्रतिलिपि न भेजना प्रशासनिक प्रक्रिया की एक गंभीर चूक प्रतीत होती है। यदि प्रशासन सचमुच शुचिता और पारदर्शिता स्थापित करना चाहता है, तो जांच दल को सर्वप्रथम शिकायतकर्ता को लिखित नोटिस देकर उनके साक्ष्य संकलित करने चाहिए, ताकि जांच की विधिक विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।

वहीं शिकायतकर्ता अनशनकारी खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने कहा कि यदि जांच दल एकतरफा रिपोर्ट प्रस्तुत कर देता है, तो इसे प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन के आधार पर माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी, जहाँ अदालत से मांग की जाएगी कि ऐसी एकतरफा जांच रिपोर्ट को निरस्त कर स्वतंत्र अथवा न्यायिक निगरानी में पुनः जांच का आदेश दे जिसे निष्पक्ष न्याय हो सके।

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