मुंगेली अधिकारी के खिलाफ पत्रकारों का फूटा आक्रोश; कार्रवाई नहीं होने पर आमरण अनशन की चेतावनी

अभय न्यूज मुंगेली, 22 सितंबर 2026।
जानकारी अनुसार जिले के समस्त सजग एवं कर्तव्यनिष्ठ मीडिया प्रतिनिधियों और पत्रकारों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व में मुंगेली जिले में पदस्थापना के दौरान तत्कालीन सहायक संचालक/जनसंपर्क अधिकारी रहे सुजीत कुमार सिंह (वर्तमान पदस्थापना: रायगढ़) के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और पत्रकारों को अपमानित करने के आरोपों को लेकर महामहिम राज्यपाल के नाम एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा गया है।

ज्ञापन – 
गंभीर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप
पत्रकारों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अधिकारी सुजीत कुमार सिंह ने मुंगेली में अपनी पदस्थापना के दौरान मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के नाम पर शासकीय विज्ञापनों तथा स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) जैसे प्रमुख आयोजनों की आड़ में कथित रूप से फर्जी और सुनियोजित वित्तीय अनियमितताएं की हैं। विभिन्न विभागों के अधिकारियों से साठगांठ कर अवैध वसूली को अंजाम दिया गया है, जो सीधे तौर पर लोक सेवक आचरण संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।
पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का आरोप
ज्ञापन के अनुसार, रायगढ़ स्थानांतरण के बाद संबंधित अधिकारी ने मुंगेली जिले के पत्रकारों के खिलाफ द्वेषपूर्ण, अमर्यादित और मानहानिकारक टिप्पणियां की हैं। सार्वजनिक मंचों पर पत्रकारों के लिए “गांजा तस्कर”, “बिकाऊ मीडिया से जुड़े व्यक्ति” तथा “₹50-100 में बिकने वाले” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है।
पत्रकारों की मुख्य मांगें-
1. **तत्काल निलंबन:** प्रशासनिक जांच की निष्पक्षता और साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से निलंबित किया जाए।
2. **FIR दर्ज हो:** पत्रकारों के खिलाफ अपमानजनक और अमर्यादित शब्दावली का प्रयोग करने के संबंध में संबंधित धाराओं के तहत तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए।
3. **उच्च स्तरीय जांच:** विज्ञापनों और आयोजनों के नाम पर की गई अवैध वसूली तथा वित्तीय कदाचार की सत्यता उजागर करने के लिए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी अन्य उच्च स्तरीय स्वतंत्र राज्य एजेंसी से कराई जाए।
4. **फॉरेंसिक जांच:** प्रकरण से जुड़े डिजिटल, ऑडियो और वीडियो साक्ष्यों को तुरंत राज्य/केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) से प्रमाणित कराया जाए, ताकि तकनीकी फेरबदल की गुंजाइश न रहे।
10 दिनों का अल्टीमेटम, फिर आमरण अनशन
पत्रकारों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर उक्त मांगों पर कोई ठोस और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो जिले के समस्त पत्रकार लोकतंत्र की रक्षा और अपनी गरिमा बहाल करने के लिए सामूहिक रूप से **आमरण अनशन** करने को बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।