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मुंगेली जनसंपर्क अधिकारी विवाद: रायपुर में पत्रकार का एकल अनशन समाप्त; अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामूहिक सत्याग्रह की तैयारी

अभय न्यूज रायपुर/मुंगेली,13 अक्टूबर 2026।

मुंगेली जिले में पदस्थापना के दौरान तत्कालीन सहायक संचालक एवं जनसंपर्क अधिकारी पर लगे गंभीर वित्तीय कदाचार तथा मीडिया प्रतिनिधियों पर अमर्यादित टिप्पणियों के आरोपों को लेकर जारी गतिरोध अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने की ओर अग्रसर है। नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर बीते कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी का एकल अनशन मुंगेली से पहुंचे तीन दर्जन से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने समाप्त करवा दिया है। पत्रकारों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि इसे देश की राजधानी तक ले जाने की नई रणनीति का हिस्सा है।

प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ा आक्रोश, दिल्ली में होगा आंदोलन
धरना स्थल पर जुटे मीडिया प्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनदर्शन, जिला प्रशासन तथा महामहिम राज्यपाल तक विधिवत ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद विहित अवधि में कोई ठोस व पारदर्शी जांच शुरू नहीं की गई। प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए पत्रकारों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि अब इस संवैधानिक लड़ाई को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर ले जाया जाएगा। पत्रकार संघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, वे देश के राष्ट्रपति से मुलाकात कर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा, प्रशासनिक शुचिता और प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।

शासकीय विज्ञापनों में हेरफेर और पत्रकारों के अपमान का है आरोप
प्रकरण के अनुसार, मुंगेली जिले के मीडिया प्रतिनिधियों ने पूर्व में राज्यपाल महोदय को सौंपे विस्तृत ज्ञापन में आरोप लगाया था कि तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी द्वारा शासकीय विज्ञापनों एवं आयोजनों के नाम पर व्यापक वित्तीय अनियमितताएं की गईं। इसके अतिरिक्त, स्थानांतरण के बाद एक कथित ऑडियो में जिले के पत्रकारों के विरुद्ध बेहद अशोभनीय व मानहानिकारक टिप्पणियों के प्रयोग का भी आरोप है। इन गंभीर विषयों पर सीएम हेल्पलाइन और पीएम-पीजी पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन तय समय-सीमा में जांच प्रक्रिया आगे न बढ़ने से क्षुब्ध होकर खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने तूता में अनशन शुरू किया था। 

आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत

विधिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो जब भी किसी शासकीय अधिकारी पर सेवा आचरण संहिता के उल्लंघन या वित्तीय विसंगतियों के आरोप लगते हैं, तो समयबद्ध प्राथमिक जांच स्थापित करना बेहद आवश्यक माना जाता है। मुंगेली के पत्रकारों का मत है कि राज्य स्तर पर संज्ञान में विलंब होने के कारण अब उन्हें केंद्र और संवैधानिक प्रमुख के समक्ष अपनी बात रखने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। स्थानीय अनशन को समाप्त कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैकड़ों की संख्या में सामूहिक सत्याग्रह करने की यह योजना इस आंदोलन के दूसरे चरण को रेखांकित करती है। 

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