14 साल बाद भी मुंगेली को गोवंश एम्बुलेंस नसीब नहीं, घायल गायों के इलाज में देरी; मृत पशुओं को उठाने जेसीबी का सहारा

सड़क हादसों में घायल गोवंश को समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था नदारद, एम्बुलेंस की मांग के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठे सवाल
अभय न्यूज मुंगेली, 08 नवंबर 2026।
वर्ष 2012 में जिला बनने के बाद मुंगेली ने विकास के कई पड़ाव तय किए, लेकिन गोवंश के संरक्षण और उपचार से जुड़ी एक बुनियादी सुविधा आज भी जिले को नसीब नहीं हुई है। जिले में सड़क दुर्घटनाओं में घायल गायों और अन्य गोवंश को तत्काल पशु चिकित्सालय पहुंचाने के लिए समर्पित एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समय पर उपचार नहीं मिलने से घायल पशुओं की जान पर खतरा बना रहता है।
हादसे के बाद इलाज के लिए इंतजार, व्यवस्था के अभाव में परेशानी
मुंगेली जिले की सड़कों पर आए दिन गाय और अन्य गोवंश सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। कई बार वाहन की टक्कर से पशु गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और उन्हें तत्काल उपचार की जरूरत होती है। लेकिन विशेष एम्बुलेंस की सुविधा नहीं होने के कारण घायल गोवंश को अस्पताल तक पहुंचाने में मुश्किलें आती हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मौत के बाद जेसीबी से उठाए जाते हैं मृत गोवंश
व्यवस्था की दूसरी चिंताजनक तस्वीर तब सामने आती है, जब सड़क हादसे में किसी गोवंश की मौत हो जाती है। मृत पशुओं को सड़क से हटाने के लिए नगर पालिका की जेसीबी का सहारा लेना पड़ता है। गोवंश संरक्षण और सेवा की बातों के बीच ऐसी स्थिति व्यवस्था की संवेदनशीलता और तैयारियों पर सवाल खड़े करती है।
कई बार उठी मांग, फिर भी नहीं मिली एम्बुलेंस
गोवंश के लिए समर्पित एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की मांग पहले भी कई बार उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई है। सवाल यह है कि जब जिला बने 14 वर्ष होने जा रहे हैं, तो क्या घायल गोवंश को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक एम्बुलेंस की व्यवस्था भी नहीं की जा सकती?
प्रशासन से ठोस पहल की मांग
गोवंश संरक्षण के लिए केवल योजनाएं और घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का जमीन पर उपलब्ध होना भी जरूरी है। जिले में कम से कम एक समर्पित गोवंश एम्बुलेंस की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि सड़क हादसों में घायल पशुओं को तत्काल पशु चिकित्सालय पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही मृत गोवंश के सम्मानजनक और व्यवस्थित निस्तारण की व्यवस्था भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन, पशुधन विकास विभाग और नगर पालिका पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस जनहित के मुद्दे पर जिम्मेदार विभाग कब संज्ञान लेते हैं और मुंगेली को गोवंश एम्बुलेंस की सुविधा कब मिलती है।

