नेवासपुर नाबालिग हत्याकांड: आरोपियों की जमानत निरस्त, CJM का आदेश अपर सत्र न्यायालय ने पलटा

मुंगेली पुलिस की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय का फैसला, गिरफ्तारी प्रक्रिया में कथित खामियों का मुद्दा फिर चर्चा में
अभय न्यूज मुंगेली, 29 अक्टूबर 2026।
मुंगेली जिले के ग्राम नेवासपुर में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। आरोपियों को जमानत दिए जाने के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय के आदेश को अपर सत्र न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए उनकी रिमांड स्वीकार किए जाने की बात भी सामने आई है। इस फैसले के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजरें टिकी हैं।
पुलिस ने CJM के जमानत आदेश को दी थी चुनौती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेवासपुर हत्याकांड में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद CJM न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। गिरफ्तारी की प्रक्रिया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के पालन को लेकर सवाल उठने के बाद मुंगेली पुलिस ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए अपर सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका प्रस्तुत की। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायालय ने जमानत आदेश निरस्त कर दिया।
BNSS की धाराओं के अनुपालन पर उठे सवाल
मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3), 47 और 48 के अनुपालन को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। बताया गया कि गिरफ्तारी से पहले नोटिस, गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देने तथा संबंधित दस्तावेजों में आवश्यक विवरण दर्ज करने जैसे बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे। इन कथित प्रक्रियात्मक कमियों को आरोपियों को जमानत दिए जाने के आधारों में शामिल बताया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2026 के एक आदेश का हवाला दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, संबंधित फैसले का नाम, प्रकरण क्रमांक और अपर सत्र न्यायालय के निर्णय में उसकी भूमिका की पुष्टि लिखित न्यायालयीन आदेश से होना बाकी है।

विवेचना अधिकारी की भूमिका भी चर्चा में
मामले की विवेचना प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नवीन कुमार द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। गिरफ्तारी की प्रक्रिया और विवेचना संबंधी दस्तावेजों में समय के उल्लेख को लेकर उठे सवालों के बाद संबंधित अधिकारी की भूमिका भी चर्चा में रही। विभागीय कार्रवाई के लिए पत्राचार किए जाने की बात कही गई है, लेकिन कार्रवाई की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अब आगे की कार्रवाई पर नजर
अपर सत्र न्यायालय के आदेश के बाद आरोपियों की अभिरक्षा, रिमांड और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। इन पहलुओं की स्पष्ट जानकारी न्यायालय के लिखित आदेश और पुलिस के आधिकारिक बयान से ही सामने आ सकेगी।
नेवासपुर नाबालिग हत्याकांड में यह घटनाक्रम गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया और न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। अब मामले में आगे की कार्रवाई के साथ-साथ अपर सत्र न्यायालय के विस्तृत आदेश पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

नोट: न्यायालय के लिखित आदेश और संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विवरण उपलब्ध होने पर मामले के कानूनी आधार की अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।