मुंगेली में “सुरक्षित बचपन अभियान” का शंखनाद: लायर्स हॉल में जजों व पुलिस ने दी पॉक्सो एक्ट और ऑनलाइन सुरक्षा की ट्रेनिंग, 31 अक्टूबर तक चलेगा पहला चरण

अभय न्यूज मुंगेली,26 अक्टूबर 2026।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुंगेली द्वारा बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ी पहल की गई है। स्थानीय लायर्स हॉल में “जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार” की थीम पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य संदेश “हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी” रखा गया, जिसके तहत शिक्षकों, पुलिसकर्मियों और विभिन्न शासकीय विभागों के प्रतिनिधियों को बाल संरक्षण कानूनों के प्रति संवेदनशील बनाया गया।
पॉक्सो एक्ट और डिजिटल खतरों से सुरक्षा पर रहा मुख्य जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती गिरिजा देवी मरावी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं प्रभारी सचिव सतीश कुमार खाखा, मुख्य विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता टीकम चंद्राकर तथा पथरिया थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े ने महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियां साझा कीं। वक्ताओं ने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act, 2012) के कड़े प्रावधानों, बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा, इंटरनेट के इस दौर में ऑनलाइन सुरक्षा (Cyber Safety), शिकायत दर्ज कराने की सही प्रक्रिया और निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में विस्तार से समझाया।
न्यायाधीशों, शिक्षकों और पुलिस अधिकारियों की रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र में जिला न्यायालय मुंगेली के समस्त माननीय न्यायाधीशगण, मुंगेली विकासखंड के शासकीय एवं निजी स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं, जिला कलेक्टोरेट, शिक्षा विभाग व पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, पैरा लीगल वालंटियर्स (PLVs) तथा बाल कल्याण समिति के अधिकारी-कर्मचारी प्रमुख रूप से शामिल हुए।
दो चरणों में मील का पत्थर साबित होगा यह अभियान
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए इस अभियान को दो व्यवस्थित चरणों में चलाया जा रहा है:
प्रथम चरण (31 अक्टूबर 2026 तक): इसके तहत जिले भर में सघन जागरूकता अभियान चलाकर समाज के हर वर्ग को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
द्वितीय चरण (12 नवंबर 2026 से शुरू): इस चरण में सीधे स्कूली स्तर पर जाकर बच्चों की क्षमता निर्माण (Capacity Building) और निरंतर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पुलिस, शिक्षा विभाग, विधिक सेवा संस्थाओं और बाल संरक्षण से जुड़े विभागों के बीच एक मजबूत समन्वय (Coordination) स्थापित करना है, ताकि मुसीबत में फंसे किसी भी बच्चे को बिना किसी देरी के त्वरित न्याय और प्रशासनिक संरक्षण मिल सके।