मुंगेली नाबालिग हत्याकांड में बड़ा उलटफेर: कोर्ट ने खारिज की पुलिस की रिमांड अर्जी, गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामी मिलने पर दोनों आरोपी रिहा; SSP ने कहा—कार्रवाई विधिसम्मत

अभय न्यूज मुंगेली,24 अक्टूबर 2026।
मुंगेली जिले के थाना सिटी कोतवाली अंतर्गत ग्राम नेवासपुर में 17 वर्षीय नाबालिग बालिका की गला घोंटकर हत्या किए जाने के सनसनीखेज मामले में एक बड़ा कानूनी उलटफेर सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों की पुलिस द्वारा लगाई गई न्यायिक रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियागत खामियां और लापरवाही पाते हुए दोनों आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गिरफ्तारी की तारीखों में मिला बड़ा झोल, कोर्ट सख्त
अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष (आरोपियों के वकील) ने पुलिसिया कार्रवाई की पोल खोलते हुए गंभीर आरोप लगाया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों आरोपियों को पुलिस द्वारा 20 अक्टूबर को ही थाने बुलाकर हिरासत में ले लिया गया था, जबकि पुलिस के सरकारी दस्तावेजों में उनकी गिरफ्तारी 22 अक्टूबर दर्ज की गई थी।
अदालत ने इन दो दिनों के अंतर को गंभीरता से लिया और गिरफ्तारी के आधार की लिखित जानकारी, कानूनी नोटिस तथा अन्य आवश्यक प्रक्रियागत औपचारिकताओं में भारी कमियां पाईं। इस लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने प्रशिक्षु उपनिरीक्षक (Probationer SI) नवीन कुमार से लिखित जवाब तलब किया है। साथ ही इस आदेश की एक प्रति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मुंगेली, पुलिस महानिरीक्षक (IG) बिलासपुर रेंज और पुलिस महानिदेशक (DGP) छत्तीसगढ़ को भेजने के निर्देश दिए हैं।
ये था पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, 19 और 20 अक्टूबर की दरम्यानी रात ग्राम नेवासपुर में 17 वर्षीय नाबालिग बालिका की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मर्ग जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी अजीत घृतलहरे और उसके साथी साहिल खांडे को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर 22 अक्टूबर को रिमांड के लिए कोर्ट में पेश किया था।
एसएसपी ने पुलिस कार्रवाई को बताया विधिसम्मत
अदालत द्वारा रिमांड अर्जी खारिज किए जाने और आरोपियों की रिहाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस संबंध में जब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री भोजराम पटेल से बात की गई, तो उन्होंने पुलिस टीम का बचाव करते हुए कहा कि मुंगेली पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध पूरी तरह से विधि सम्मत (कानूनी दायरे में) कार्रवाई की है।
चर्चाओं का बाजार गर्म, पीड़ित परिवार परेशान
दूसरी ओर, मृतका के दादा उत्तम मोहले ने जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, परिवार की सुरक्षा और आर्थिक सहायता की मांग की है। आरोपियों की इस तरह रिहाई के बाद यह पूरा मामला अब पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया, लापरवाही और हत्या की मूल विवेचना, दोनों ही पहलुओं को लेकर जिले में भारी चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के आदेश और पुलिस के दावों के बीच आगे की कानूनी लड़ाई में क्या रुख सामने आता है।


