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मुंगेली में 4.53 करोड़ के म्यूल अकाउंट मामले में बड़ा फैसला, आरोपी को 3 साल का सश्रम कारावास

साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में बैंक खातों के इस्तेमाल का मामला; 14 गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सुनाई सजा, अन्य आरोपियों को मिला संदेह का लाभ

अभय न्यूज मुंगेली, 23 अक्टूबर 2026।

साइबर ठगी की करोड़ों रुपये की रकम के लेन-देन में बैंक खातों के कथित इस्तेमाल से जुड़े मामले में मुंगेली न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी ने आरोपी संजीव खांडे को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 317(2) के तहत दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने 22 अक्टूबर को यह निर्णय सुनाया।

4.53 करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़ा मामला

प्रकरण थाना सिटी कोतवाली मुंगेली के अपराध क्रमांक 77/2025 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, ग्राम बोदा, थाना फास्टरपुर, जिला मुंगेली निवासी 38 वर्षीय संजीव खांडे पर अपने और परिचितों के नाम से बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के रूप में कराने का आरोप था। इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी से प्राप्त 4 करोड़ 53 लाख 89 हजार 567 रुपये के लेन-देन की बात सामने आई थी।

मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 111, 317(2), 317(4), 317(5) एवं 3(5) के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को धारा 317(2) के तहत दोषी ठहराया।

14 गवाहों के जरिए अभियोजन ने रखे साक्ष्य

प्रकरण में लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर  ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष 14 गवाहों के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत किया। वहीं, इसी मामले के अन्य अभियुक्तों को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है। प्रकरण में कुछ आरोपी अभी फरार बताए गए हैं।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने या निकालने के लिए किया जाता है। साइबर अपराधी कई बार लालच देकर या अन्य तरीकों से दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि ठगी की रकम के वास्तविक स्रोत और लेन-देन से जुड़े लोगों की पहचान छिपाई जा सके।

मुंगेली न्यायालय का यह फैसला साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई है।

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