मुंगेली जिला अस्पताल में ऑपरेशन के नाम पर ₹15 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप; सिविल सर्जन ने बैठाई जांच

अभय न्यूज मुंगेली,23 सितंबर 2026।
जिला चिकित्सालय मुंगेली एक बार फिर अपनी बदहाल व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में है। अस्पताल में एक मरीज के ऑपरेशन के नाम पर ₹15,000 की रिश्वत मांगने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। चारभाठा निवासी लव सिंह ने सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर कंप्यूटर ऑपरेटर देवेंद्र साहू पर यह गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन प्रति –

**ऑपरेशन के नाम पर पैसे मांगने और धमकाने का आरोप**
शिकायत के अनुसार, लव सिंह 2 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12 बजे अपनी पत्नी मोनिका सिंह को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे। आरोप है कि वहां तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर देवेंद्र साहू ने ऑपरेशन कराने के एवज में ₹15,000 की मांग की। शिकायतकर्ता का कहना है कि पैसे न देने पर उन्हें इलाज और ऑपरेशन के लिए जानबूझकर परेशान किया गया। इसके बाद 4 सितंबर 2026 की सुबह मोबाइल नंबर 8103788800 से फोन कर दोबारा पैसे जमा करने का दबाव भी बनाया गया।
**निजी अस्पतालों में रेफर करने का खेल! डॉक्टर और 102 एंबुलेंस पर उठे सवाल**
शिकायत में जिला अस्पताल के डॉक्टरों और सरकारी एंबुलेंस की मिलीभगत की ओर भी इशारा किया गया है:
* **डॉक्टर पर आरोप:** मरीज की रात में तबीयत बिगड़ने पर जब पीड़ित ने डॉक्टर आनंद मांझी से फोन पर संपर्क किया, तो उन्होंने मरीज को जिला अस्पताल में देखने के बजाय कथित तौर पर निजी अस्पताल ‘लाइफलाइन’ ले जाने की सलाह दे दी।
* **एंबुलेंस चालक की भूमिका:** पीड़ित ने 102 एंबुलेंस (वाहन क्रमांक CG07CP2993) के चालक पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि एंबुलेंस चालक द्वारा मरीज को सरकारी मदद देने के बजाय मुंगेली के दो निजी अस्पतालों—’लाइफलाइन’ और ‘पारख’ ले जाने का दबाव बनाया जा रहा था।
**सिविल सर्जन ने कहा— जांच टीम गठित, दोषी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई**
इस संवेदनशील मामले को लेकर जब जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश से चर्चा की गई, तो उन्होंने बताया कि शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया गया है। मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जांच टीम की रिपोर्ट में जो भी कर्मचारी या डॉक्टर दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार तत्काल और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि जांच टीम की यह रिपोर्ट कब तक सामने आती है और क्या गरीब मरीजों को सरकारी अस्पताल में इस तरह प्रताड़ित करने वाले चेहरों को बेनकाब कर उन पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।