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सचीपुरम और सोनकर सेल्स कॉलोनी के हजारों रहवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित, कब जागेगा प्रशासन? वोट और टैक्स लेने के समय ‘वैध’, मूलभूत सुविधा मांगने के समय अवैध’! जिम्मेदारों पर उठे बड़े सवाल

सड़क, नाली और जल निकासी के अभाव से परेशान रहवासी; टैक्स वसूली और सरकारी रिकॉर्ड में शामिल होने के बावजूद सुविधाएं नहीं मिलने पर प्रशासन से जवाब की मांग।

अभय न्यूज मुंगेली।10 जुलाई 2026।

नगर पालिका परिषद मुंगेली के विकास संबंधी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नवागढ़ रोड स्थित सचीपुरम कॉलोनी तथा बिलासपुर रोड स्थित सोनकर सेल्स कॉलोनी में साफ दिखाई देता है। वर्षों से इन कॉलोनियों में हजारों लोग अपने परिवार के साथ निवास कर रहे हैं, लेकिन आज भी सड़क, नाली, जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि जीवनभर की पूंजी लगाकर घर बनाने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हुई हैं।

रहवासियों के अनुसार कॉलोनियों के विकास के दौरान संबंधित कालोनाइजरों ने पक्की सड़क, नालियां, बेहतर जल निकासी और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का वादा किया था। इन दावों पर भरोसा कर लोगों ने प्लॉट खरीदे और मकान बनाए, लेकिन समय बीतने के बाद भी अधिकांश वादे अधूरे रह गए। वर्तमान में दोनों कॉलोनियों में सड़कें जर्जर हैं, नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं है और बारिश के मौसम में कीचड़ व जलभराव से लोगों का आवागमन प्रभावित हो जाता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मानसून के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। कच्ची सड़कों पर कीचड़, जलभराव और नालियों से उठने वाली दुर्गंध के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार रहवासी अपने ही घरों में सीमित रहने को मजबूर हो जाते हैं।

रहवासियों का आरोप है कि वर्षों से वे नगर पालिका परिषद, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग करते आ रहे हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई बार मुलाकात भी की गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

स्थानीय लोगों ने संबंधित कालोनाइजरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कॉलोनी विकसित करने के नाम पर सुविधाओं का वादा किया गया था और उनका पालन नहीं हुआ, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

रहवासियों का यह भी कहना है कि जब वे नगर पालिका से सुविधाओं की मांग करते हैं, तब उन्हें कॉलोनी को अवैध बताकर कार्य नहीं किए जाने की बात कही जाती है। वहीं दूसरी ओर इन्हीं कॉलोनियों में भवन अनुज्ञा जारी होने, बिजली कनेक्शन मिलने, संपत्ति कर की वसूली होने तथा हाल ही में डीडीएन योजना के तहत घरों पर क्यूआर कोड युक्त बोर्ड लगाए जाने का हवाला देते हुए नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि सभी सरकारी रिकॉर्ड में इन कॉलोनियों का विवरण दर्ज है और कर वसूला जा रहा है, तो मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के समय इन्हें अवैध कैसे माना जा सकता है।

रहवासियों का कहना है कि चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि विकास के वादों के साथ कॉलोनियों में पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। इससे लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि कॉलोनियों में शीघ्र सड़क, नाली और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल सचीपुरम और सोनकर सेल्स कॉलोनी के रहवासी वर्षों से लंबित अपनी बुनियादी सुविधाओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब देखना होगा कि नगर पालिका परिषद, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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