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हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला: पिता-पुत्र को उम्रकैद, सह-आरोपी महिला को भी सश्रम कारावास

लोक अभियोजक रजनीकांत ठाकुर की प्रभावी पैरवी से वर्ष 2026 में अब तक 18 मामलों में हो चुकी है सजा

अभय न्यूज मुंगेली। 13जुलाई 2026।

जिले से एक बड़ी न्यायिक खबर सामने आई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सोम की अदालत ने हत्या और जानलेवा हमले के चर्चित मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी हीरालाल निषाद और उसके बेटे देवचरण उर्फ सूरज निषाद को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं सह-आरोपी गंगोत्री बाई को बलवा एवं मारपीट से संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।

यह मामला थाना सिटी कोतवाली मुंगेली क्षेत्र के ग्राम लिम्हा का है। अभियोजन के अनुसार, प्रेम प्रसंग के संदेह और वर्षों पुरानी रंजिश के चलते 26 नवंबर 2023 की रात आरोपियों ने एक परिवार पर लाठी, पत्थर और अन्य हथियारों से हमला कर दिया था। इस हमले में भागवत निषाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनकी जिला अस्पताल मुंगेली में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। घटना में परिवार की अन्य महिलाओं को भी चोटें आई थीं। मामले में अपराध क्रमांक 492/2023 दर्ज कर पुलिस ने 27 नवंबर 2023 को आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था।सुनवाई के दौरान शासन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने 17 गवाहों, चिकित्सीय साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों मुख्य आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी मानते हुए हत्या के अपराध में आजीवन सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही बलवा और मारपीट की धाराओं में भी अलग-अलग सजा एवं जुर्माना लगाया गया। सह-आरोपी गंगोत्री बाई को हत्या की धारा से राहत मिली, लेकिन बलवा और मारपीट में सहभागिता सिद्ध होने पर उसे भी सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि समाज में इस प्रकार के जघन्य अपराधों के लिए कोई स्थान नहीं है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोषियों को कठोर दंड मिलना आवश्यक है। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्यायालय के निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया।

इस फैसले की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि जनवरी 2026 से 13 जुलाई 2026 तक लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर की प्रभावी पैरवी के चलते 18 अलग-अलग आपराधिक प्रकरणों में दोषियों को सजा दिलाई जा चुकी है, जिसे न्यायिक क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।

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