सिस्टम ने जिंदा महिला को बताया मृत! भूरी बाई ‘खुद को जीवित साबित करने’ पहुंची कलेक्टर जनदर्शन
महतारी वंदन योजना की राशि हुई बंद,

अभय न्यूज मुंगेली,
जिले के कलेक्टर जनदर्शन में एक मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जीवित महिला को सरकारी सिस्टम में मृत घोषित कर दिया गया, जिसके कारण उसे प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ मिलना बंद हो गया। परेशान महिला अब अपने बेटे के साथ सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और खुद को जीवित साबित करने के लिए मजबूर है।
यह मामला मुंगेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बलौदी के आश्रित ग्राम गीतपूरी का है। यहां की निवासी भूरी बाई यादव, पति रजवा यादव ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर बताया कि उन्हें जनवरी 2026 के बाद से महतारी वंदन योजना की राशि नहीं मिल रही है।
- एजेंट ने कहा- “तुम भगवान के घर चली गई हो”
भूरी बाई के अनुसार जब कई महीनों तक उनके खाते में योजना की राशि नहीं पहुंची तो उन्होंने गांव में इसकी जानकारी लेने का प्रयास किया। पहले उन्हें बताया गया कि राशि नहीं आई है, लेकिन जब लगातार दूसरे महीने भी भुगतान नहीं हुआ तो गांव के एक कियोस्क एजेंट ने उन्हें चौंकाने वाली जानकारी दी।एजेंट ने जानकारी देते हुए बताया कि “तुम भगवान के घर चल दी हो, इसलिए तुम्हारा पैसा नहीं आया है।”
यह सुनकर भूरी बाई और उनका परिवार स्तब्ध रह गया। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन रिकॉर्ड निकलवाया, जिसमें पता चला कि उन्हें 1 फरवरी 2026 से मृत घोषित कर दिया गया है।
- “जिंदा हूं, फिर भी सरकारी कागजों में मृत”
सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किए जाने से भूरी बाई को न केवल महतारी वंदन योजना का लाभ मिलना बंद हो गया, बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं और सुविधाओं पर भी संकट खड़ा हो सकता है। इसी समस्या को लेकर वे अपने बेटे गुनुराम यादव के साथ कलेक्टर जनदर्शन पहुंचीं और आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि पिछले तीन माह से योजना की राशि नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- प्रशासन का दावा: दूसरे नाम की महिला की मौत से हुई गड़बड़ी
इस पूरे मामले में अपर कलेक्टर जी.एल.यादव ने बताया कि भूरी बाई यादव का आवेदन प्राप्त हुआ है। प्रारंभिक जांच में विभागीय अधिकारियों से जानकारी मिली है कि उसी गांव में भूरी बाई नाम की एक अन्य महिला की मृत्यु हुई थी, जिसके कारण तकनीकी या मानवीय त्रुटि से जीवित भूरी बाई यादव का नाम लाभार्थी सूची से हट गया।
अपर कलेक्टर के अनुसार, मामले को सुधारने के लिए विभाग द्वारा शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद महिला को फिर से योजना का लाभ मिलने लगेगा।
- बेटे ने प्रशासनिक दावे पर उठाए सवाल
हालांकि प्रशासन की इस सफाई पर पीड़ित परिवार ने सवाल खड़े किए हैं। भूरी बाई के बेटे गुनुराम यादव का कहना है कि गांव में भूरी बाई नाम की दो-तीन महिलाएं जरूर हैं, लेकिन उनकी जानकारी में किसी भी भूरी बाई की मृत्यु नहीं हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि गांव में किसी भूरी बाई की मौत नहीं हुई तो फिर उनकी मां को मृत घोषित करने का आधार क्या था? परिवार का कहना है कि कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है और अब अधिकारी अपनी गलती छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
- जांच और जवाबदेही की मांग
इस घटना ने सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कोई जीवित व्यक्ति सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित हो सकता है,तो यह न केवल प्रशासनिक चूक है बल्कि संबंधित व्यक्ति के अधिकारों का भी हनन है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
- आखिर किस आधार पर भूरी बाई यादव को मृत घोषित किया गया?
- क्या यह केवल तकनीकी त्रुटि है या किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई है?
- यदि गांव में किसी भूरी बाई की मृत्यु नहीं हुई,जैसा कि परिजन दावा कर रहे हैं,तो रिकॉर्ड में मौत की एंट्री किसकी दर्ज की गई?
- इस गलती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
फिलहाल पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं प्रशासन ने त्रुटि सुधार कर महिला को दोबारा योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि जांच में सच्चाई क्या सामने आती है और भूरी बाई यादव को कब तक उनका अधिकार वापस मिल पाता है।